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Saturday, July 1, 2017

स्वीकार


   नॉर्थफील्ड, मिनिसोटा की सेंट ओलाफ संगीत मण्डली अपने अति उत्तम संगीत के लिए जानी जाती है। उनकी इस उत्तमता का एक कारण है उनके सदस्यों के मण्डली में सम्मिलित होने के लिए की गई चयन प्रक्रिया। सम्मिलित होने के लिए निवेदन करने वालों का आँकलन न केवल इस बात पर होता है कि वे कितना अच्छा गाते हैं, वरन इस बात पर भी कि पूरी मण्डली के साथ गाते हुए उनकी आवाज़ कैसी सुनाई देती है। इस उत्तमता एक और कारण है कि मण्डली के सभी सदस्य इस बात से सहमत रहते हैं कि संगीत मण्डली ही उनकी पहली प्राथमिकता होगी और वे सब मिलकर एक कड़े अभ्यास और प्रदर्शन कार्यक्रम में भाग लेंगे।

   इस संगीत मण्डली की एक बात जो मुझे बहुत रुचिकर लगती है वह है कि अभ्यास के दौरान यदि मण्डली का कोई सदस्य गलती कर देता है तो वह अपना हाथ उठा देता है। अपनी गलती को छिपाने के स्थान पर वे उसकी ओर ध्यान आकर्षित करते हैं जिससे संचालक प्रत्येक गायक को उस कठिन भाग को सीखने में सहायता कर सके। इससे उनका प्रदर्शन दोषरहित होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

   मेरा मानना है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में जब प्रभु यीशु ने निकुदेमुस से बातचीत के दौरान उससे कहा कि परमेश्वर ने अपने पुत्र को संसार को उद्धार का मार्ग देने के लिए भेजा है न कि उसे दंड देने के लिए (यूहन्ना 3:17), तो प्रभु का तात्पर्य उस मण्डली के समान परस्पर मिलजुल कर कार्य करने वाले तथा अपनी गलतियों को सुधारने के लिए तत्पर समाज की स्थापना करना था। निकुदेमुस से हुई इस वार्तालाप के कुछ समय पश्चात ही प्रभु यीशु की उस सामरी स्त्री से सार्वजनिक कुएं के किनारे बातचीत हुई। प्रभु ने उस स्त्री के लिए अपनी गलतियों को स्वीकार कर लेना सरल बना दिया, उसे बेहतर जीवन के आश्वासन के द्वारा, जो प्रभु से मिली पापों की क्षमा के आनन्द पर आधारित था (यूहन्ना 4)।

   हम मसीही विश्वासी पृथ्वी पर प्रभु की देह के अंग है, और हमें अपनी गलतियों को स्वीकार करने से डरना नहीं चाहिए; वरन उसे ऐसा अवसर समझना चाहिए जिसमें हम एक साथ मिलकर प्रभु से मिली क्षमा के आनन्द में आनन्दित हो सकते हैं। गलतियों को स्वीकार करना ही गलतियों के निवारण का आरंभ है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब तक हम अपने पापों का सामना करने को तैयार नहीं होंगे, 
हम उन्हें अपने से दूर भी नहीं करने पाएंगे।

परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:6-15, 28-30
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 
John 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं। 
John 4:28 तब स्त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी। 
John 4:29 आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है? 
John 4:30 सो वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 20-21
  • प्रेरितों 10:24-48