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Tuesday, January 31, 2017

द्वार


   ट्रेन चलने को थी; ट्रेन के बन्द होते द्वारों की सूचक ध्वनि बजनी आरंभ हो गई थी। लेकिन फिर भी विलंब से आने वाले कुछ लोग भागकर ट्रेन में चढ़ने का प्रयास करने लगे; उनमें से एक के ऊपर द्वार बन्द भी हुआ, परन्तु उससे टकराकर द्वार फिर से खुल गया, और वह यात्री सुरक्षित ट्रेन के अन्दर आ गया। मैं सोचने लगा कि लोग इतना जोखिम क्यों उठाते हैं जब कि इस से अगली ट्रेन मात्र 4 मिनट में आने वाली थी।

   लेकिन एक द्वार है जो कभी भी, बिना किसी चेतावनी के, सदा के लिए बन्द हो जाएगा और किसी के लिए किसी भी परिस्थिति में फिर कभी नहीं खुलेगा - परमेश्वर के अनुग्रह का द्वार। समस्त मानव जाति को उनके पापों की क्षमा प्रदान करने तथा उन्हें सेंत-मेंत उद्धार का मार्ग देने के लिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह को संसार में भेजा और उन्होंने यह कार्य पूरा करके आज सबके लिए यह मार्ग तैयार करके दे दिया है। अब इसे स्वीकार करना और इसपर अग्रसर होना यह प्रत्येक व्यक्ति का अपना निर्णय है; लेकिन परमेश्वर के इस अनुग्रह का द्वार आज सब के लिए खुला है, उसका निमंत्रण सबके लिए है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा है, "...देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है" (2 कुरिन्थियों 6:2)।

   प्रभु यीशु मसीह ने यह भी बताया कि उनके दूसरे आगमन और अनुग्रह के द्वार के बन्द होने से पहले क्या चिन्ह होंगे (मत्ती 24); और आज हम अपनी आँखों के सामने उन बातों को पूरा होते देख रहे हैं, जो इस द्वार के बन्द होने का समय पूरा होने के सूचक हैं। इसलिए यह निश्चित है कि अनुग्रह का यह समय कभी भी पूरा हो जाएगा, द्वार बन्द हो जाएगा, और संसार अपने न्याय के लिए खड़ा किया जाएगा। जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह में विश्वास किया और उससे अपने पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित किया है, उन्हें प्रभु यीशु कहेगा, "तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है" (मत्ती 25:34), परन्तु शेष सभी उसके पास से अनन्त विनाश में चले जाएंगे, "तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है" (मत्ती 25:41)।

   प्रभु यीशु मसीह के निमंत्रण और कार्य के प्रति हमारा प्रत्युत्तर हमारे अनन्तकाल को निर्धारित करता है। प्रभु यीशु ने कहा: "द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा" (यूहन्ना 10:9); तथा, "यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (यूहन्ना 14:6); और उसका यह निमंत्रण आज आपके लिए खुला है। इससे पहले कि द्वार सदा के लिए बन्द हो जाए, परमेश्वर के अनुग्रह का लाभ उठाएं और अपना अनन्तकाल सुनिश्चित कर लें। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित होने के लिए आज के दिन से अच्छा और कोई समय नहीं है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:14-6:2
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। 
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। 
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। 
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।
2 Corinthians 6:1 और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्वर का अनुग्रह जो तुम पर हुआ, व्यर्थ न रहने दो। 
2 Corinthians 6:2 क्योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 25-26
  • मत्ती 20:17-34


Monday, January 30, 2017

प्रार्थना


   जब मिशिगन बर्फ से ढक जाता है, तब मैं अपने नाती-पोतों तथा प्लास्टिक की स्लेज को लेकर घर के पिछवाड़े में बर्फ के टीले पर चढ़ जाता हूँ और फिर हम स्लेज पर बैठ, बर्फ पर फिसल कर टीले के नीचे आते हैं जिस में लगभग दस सेकेंड का समय लगता है; हम फिर अपनी स्लेज लेकर वापस टीले पर चढ़ जाते हैं और इस प्रकार बारंबार स्लेज के साथ बर्फ पर फिसलने का खेल खेलते रहते हैं।

   जब मैं कुछ किशोरों के साथ अलास्का जाता हूँ, जहाँ सारे वर्ष बर्फ छाई रहती है, तब हम वहाँ भी इसी प्रकार स्लेज पर बैठ बर्फ पर फिसलने का खेल खेलते हैं; फर्क यह है कि अलास्का में हम बर्फ के पहाड़ों पर चढ़कर ऐसा करते थे जिन पर से फिसल कर नीचे तक आने में 10-20 मिनट तक लगते हैं और स्लेज बहुत तेज़ी से नीचे की ओर आती हैं जिनमें हम दिल थामे हुए बैठे रहते हैं।

   चाहे मेरे घर के पिछवाड़े में 10 सेकेंड का फिसलना हो या अलास्का में 10 मिनट का, दोनों को ही स्लेजिंग कहा जाता है, दोनों के लिए एक ही उपकरण - स्लेज काम आती है, दोनों ही बर्फ के होने पर निर्भर करते हैं और दोनों ही हमको रोमांचित तथा आनन्दित करते हैं।

   मैं विचार कर रहा था कि प्रार्थना के बारे में भी कुछ ऐसा ही है। कभी-कभी हम "घर के पिछवाड़े के 10 सेकेंड" वाली प्रार्थनाएँ करते हैं - जैसे कि भोजन से पहले धन्यवाद देने की प्रार्थना, या किसी आकस्मिक परिस्थिति के लिए की गई क्षण भर की प्रार्थना। अन्य समयों पर हम "पहाड़ से नीचे जाने के लंबे समय" की प्रार्थनाएँ करते हैं, जिनमें समय, एकाग्रता, लालसा और भावनाएँ सम्मिलित होती हैं। हमें दोनों ही प्रकार की प्रार्थनाओं की आवश्यकता होती है और हमारे जीवनों में दोनों ही का स्थान है।

   हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु प्रार्थना करने में अकसर समय व्यतीत करते थे; कभी लंबे समयों तक (लूका 6:12; मरकुस 14:32-42)। चाहे क्षणिक हों या लंबी, आवश्यकता तथा समयानुसार परमेश्वर के साथ अपने मन की बात साझा करने में समय बिताएँ; परमेश्वर को दोनों ही प्रकार की प्रार्थनाएँ स्वीकार हैं, उसे आपसे दोनों ही की लालसा रहती है। प्रार्थना में जितना अधिक संपर्क उसके साथ बनाकर रखेंगे, उसके साथ आपके संबंध उतने ही अधिक घनिष्ठ होते जाएँगे। - डेव ब्रैनन


प्रार्थना का मर्म, हृदय से निकली प्रार्थना है।

और उन दिनों में वह पहाड़ पर प्रार्थना करने को निकला, और परमेश्वर से प्रार्थना करने में सारी रात बिताई। - लूका 6:12

बाइबल पाठ: मरकुस 14:32-42
Mark 14:32 फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उसने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं। 
Mark 14:33 और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा। 
Mark 14:34 और उन से कहा; मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो। 
Mark 14:35 और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिरकर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए। 
Mark 14:36 और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो। 
Mark 14:37 फिर वह आया, और उन्हें सोते पाकर पतरस से कहा; हे शमौन तू सो रहा है? क्या तू एक घड़ी भी न जाग सका? 
Mark 14:38 जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर दुर्बल है। 
Mark 14:39 और वह फिर चला गया, और वही बात कहकर प्रार्थना की। 
Mark 14:40 और फिर आकर उन्हें सोते पाया, क्योंकि उन की आंखे नींद से भरी थीं; और नहीं जानते थे कि उसे क्या उत्तर दें। 
Mark 14:41 फिर तीसरी बार आकर उन से कहा; अब सोते रहो और विश्राम करो, बस, घड़ी आ पहुंची; देखो मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। 
Mark 14:42 उठो, चलें: देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 23-24
  • मत्ती 20:1-16


Sunday, January 29, 2017

स्त्रोत


   बीस वर्षीय लेगॉन स्टीवेन्स एक अनुभवी पर्वतारोही थीं; इतनी कम आयु में भी उन्होंने मैक्किन्ले पर्वत और रेनियर पर्वत के शिखर, इक्वेडोर में स्थित एण्डियन पर्वत श्रंखला की चार चोटियों और कॉलोराडो के 39 सबसे ऊँचे पहाड़ों की सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। वह कहती थीं, "मैं इसलिए चढ़ती हूँ क्योंकि मुझे पहाड़ अच्छे लगते हैं, और वहाँ मेरी भेंट परमेश्वर से होती है।" जनवरी 2008 में दक्षिण कॉलोराडो की लिटल बीयर चोटी पर अपने भाई के साथ चढ़ते हुए लेगॉन की मृत्यु हिम-स्खलन के कारण हो गई, परन्तु उसका भाई बच गया।

   लेगॉन की मृत्योपरांत उसके माता-पिता को लेगॉन की डायरियाँ मिलीं, जिनमें उसके द्वारा लिखे गए प्रभु यीशु मसीह के साथ उसकी बहुत घनिष्टता के संबंधों को पढ़कर वे बहुत प्रभावित हुए। उसकी माँ ने कहा, "प्रभु यीशु उसके लिए सदा ही एक चमकती हुई ज्योति थे; लेगॉन ने उनके साथ संबंधों की वह गहराई और खराई अनुभव की थी जो मसीही विश्वास के अनुभवी जन भी पाने की लालसा रखते हैं।"

   हिम-स्खलन से हुई मृत्यु के तीन दिन पहले तंबू में बैठे हुए लेगॉन ने डायरी में अपनी अन्तिम बात लिखी, "परमेश्वर भला है, और हमारे जीवनों के लिए उसकी विशेष योजना है, जो उस सब से कहीं अधिक भली और आशीषित है जो हम स्वयं अपने लिए बनाते हैं; और इस बात के लिए मैं उसकी बहुत धन्यवादी हूँ। मैंने अपना सब कुछ, अपना भविष्य उसके हाथों में छोड़ दिया है, और बस उसे हर बात के लिए धन्यवाद कहती हूँ।"

   लेगॉन के यह शब्द, परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा कहे गए शब्दों : "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है" (भजन 121:2) के अनुसार है। लेगॉन के समान हमें भी इस एहसास के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए कि परमेश्वर ही हमारे जीवन, हमारे जीवन की प्रत्येक बात का स्त्रोत है; वही हमारे लिए सब कुछ निर्धारित करता है, और वह हर बात में हमारे लिए भला ही करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


अज्ञात भविष्य के लिए हम अपने सर्वज्ञानी परमेश्वर पर भरोसा रख सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28 

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पाँव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19


Saturday, January 28, 2017

इच्छा


   चीनी नव-वर्ष के समय एक-दूसरे से कही जाने वाली शुभ-कामनाओं में से बहुधा प्रयुक्त होने वाली एक शुभ-कामना है, "आपकी इच्छानुसार ही सब कुछ हो।" यह सुनने में चाहे जितनी अनोखी और अच्छी लगे, किंतु जीवन की घटनाओं का सर्वोत्तम परिणाम तब ही आता है जब मेरी नहीं वरन मेरे जीवन में परमेश्वर की इच्छा पूरी होने पाए। उदाहरण स्वरूप परमेश्वर के वचन बाइबल में पुराने नियम के एक पात्र यूसुफ के जीवन को देखें।

   यदि उसकी इच्छानुसार किया जाता तो यूसुफ कभी अपने घर-परिवार से दूर मिस्त्र में गुलामी में जाने के लिए सहमत नहीं होता; परन्तु वह दासत्व में गया (उत्पत्ति 39:1)। परन्तु अपने दासत्व में होने के बावजूद वह "भाग्यवान" हुआ अर्थात सफल हुआ, क्योंकि परमेश्वर उसके साथ था (पद 2); यहाँ तक कि यूसुफ के कारण परमेश्वर ने उसके स्वामी घर पर भी आशीष दी (पद 5)।

   यदि यूसुफ की इच्छानुसार होता, तो वह कभी भी मिस्त्र के बन्दीगृह में डाले जाने को स्वीकार नहीं करता, परन्तु पूरी ईमानदारी और खराई से कार्य करने के बावजूद, उसके स्वामी की पत्नी ने उस पर दुराचार का झूठा आरोप लगाया, जिसके कारण उसे बन्दिगृह में डाला गया, लेकिन हम तब भी उसके विषय में पढ़ते हैं कि परमेश्वर वहाँ भी उसके साथ था (पद 21)। वहाँ भी उसने बन्दीगृह के दारोगा के विश्वास को प्राप्त किया (पद 22) और जो भी वह करता था परमेश्वर उसमें उसे सफलता देता था (पद 23)। बन्दीगृह जाने और वहाँ घटित हुई घटनाओं को देखने से लगता है कि यूसुफ परेशानियों में और भी गहरा धंसता जा रहा था, परन्तु आगे का घटनाक्रम दिखाता है कि वास्तव में जो उसका पतन प्रतीत हो रहा था, वह सब उसके मिस्त्र में राजा के बाद के सर्वोच्च पद तक चढ़ाए जाने के लिए सीढ़ी थी।

   परमेश्वर ने जिस प्रकार से यूसुफ को आशीषित किया और बढ़ाया, शायद ही कोई उस प्रकार से आशीषित होना और बढ़ाया जाना स्वीकार करेगा। परन्तु परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, चाहे कैसी भी विकट और कठिन ही क्यों ना हों, परमेश्वर उन सब के द्वारा अपने बच्चों को आशीष देता है। जैसा बाद में यूसुफ ने अपने उन भाइयों से कहा जिन्होंने द्वेष में होकर उसे मिस्त्र के दासत्व में बेच दिया था, कि परमेश्वर ही उसे एक उद्देश्य के अन्तर्गत मिस्त्र लेकर आया था (उत्पत्ति 50:19-20)।

   हम मसीही विश्वासी इस बात से आश्वस्त रह सकते हैं कि हम आज जहाँ भी हैं, जैसे भी हैं, हमारे वहाँ और वैसा होने के पीछे परमेश्वर का कोई उद्देश्य है। वह जो कर रहा है, हमारे हित के लिए ही कर रहा है। इसलिए बजाए इसके कि हम यही लालसा करते रहें कि सब कुछ हमारी इच्छानुसार ही हो, हमें अपने उद्धारकर्ता और प्रभु यीशु मसीह के समान परमेश्वर से कहते रहना चाहिए: "...तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।" (मत्ती 26:39)। - सी. पी. हिया


परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने का एक उपाय है 
धीरज के साथ उसके निर्देशों की प्रतीक्षा करना।

यूसुफ ने उन से कहा, मत डरो, क्या मैं परमेश्वर की जगह पर हूं? यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। - उत्पत्ति 50:19-20

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 39:1-6;  39:19-23
Genesis 39:1 जब यूसुफ मिस्र में पहुंचाया गया, तब पोतीपर नाम एक मिस्री, जो फिरौन का हाकिम, और जल्लादों का प्रधान था, उसने उसको इश्माएलियों के हाथ, से जो उसे वहां ले गए थे, मोल लिया। 
Genesis 39:2 और यूसुफ अपने मिस्री स्वामी के घर में रहता था, और यहोवा उसके संग था; सो वह भाग्यवान पुरूष हो गया। 
Genesis 39:3 और यूसुफ के स्वामी ने देखा, कि यहोवा उसके संग रहता है, और जो काम वह करता है उसको यहोवा उसके हाथ से सफल कर देता है। 
Genesis 39:4 तब उसकी अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई, और वह उसकी सेवा टहल करने के लिये नियुक्त किया गया: फिर उसने उसको अपने घर का अधिकारी बना के अपना सब कुछ उसके हाथ में सौंप दिया। 
Genesis 39:5 और जब से उसने उसको अपने घर का और अपनी सारी सम्पत्ति का अधिकारी बनाया, तब से यहोवा यूसुफ के कारण उस मिस्री के घर पर आशीष देने लगा; और क्या घर में, क्या मैदान में, उसका जो कुछ था, सब पर यहोवा की आशीष होने लगी। 
Genesis 39:6 सो उसने अपना सब कुछ यूसुफ के हाथ में यहां तक छोड़ दिया: कि अपने खाने की रोटी को छोड़, वह अपनी सम्पत्ति का हाल कुछ न जानता था। और यूसुफ सुन्दर और रूपवान्‌ था। 
Genesis 39:19 अपनी पत्नी की ये बातें सुनकर, कि तेरे दास ने मुझ से ऐसा ऐसा काम किया, यूसुफ के स्वामी का कोप भड़का। 
Genesis 39:20 और यूसुफ के स्वामी ने उसको पकड़कर बन्दीगृह में, जहां राजा के कैदी बन्द थे, डलवा दिया: सो वह उस बन्दीगृह में रहने लगा। 
Genesis 39:21 पर यहोवा यूसुफ के संग संग रहा, और उस पर करूणा की, और बन्दीगृह के दरोगा के अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई। 
Genesis 39:22 सो बन्दीगृह के दरोगा ने उन सब बन्धुओं को, जो कारागार में थे, यूसुफ के हाथ में सौंप दिया; और जो जो काम वे वहां करते थे, वह उसी की आज्ञा से होता था। 
Genesis 39:23 बन्दीगृह के दरोगा के वश में जो कुछ था; क्योंकि उस में से उसको कोई भी वस्तु देखनी न पड़ती थी; इसलिये कि यहोवा यूसुफ के साथ था; और जो कुछ वह करता था, यहोवा उसको उस में सफलता देता था।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35


Friday, January 27, 2017

परमेश्वर का हाथ


   अमेरिका की अंतरिक्ष शोध संस्था नासा ने जब एक नए प्रकार की दूरबीन से प्रकाश के विभिन्न वर्णक्रमों को लेकर अंतरिक्ष की तस्वीरें खींचना आरंभ किया तो शोध कर्ता एक चित्र को देखकर दंग रह गए। उस चित्र में एक हाथ की ऊँगलियों, अँगूठे और खुली हुई हथेली के समान कुछ दिखता है जिसमें नीले, बैंगनी, हरे और सुनहरे रंगों की विलक्षण छटाएं भरी हुई हैं; कुछ लोगों ने इस चित्र को "परमेश्वर का हाथ" नाम दिया है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की बातों का मुख्य बिन्दु परमेश्वर द्वारा हम मनुष्यों की सहायता के लिए अपना हाथ बढ़ाना रहा है। भजन 63 में भजनकार कहता है, "क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिये मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूंगा। मेरा मन तेरे पीछे पीछे लगा चलता है; और मुझे तो तू अपने दाहिने हाथ से थाम रखता है" (पद 7-8) - भजनकार ने परमेश्वर की सहायता को, सहारे के लिए बढ़ाए गए उसके हाथ के समान अनुभव किया था। कुछ बाइबल ज्ञाताओं का मानना है कि दाऊद ने यह भजन यहूदा के बीहड़ में बिताए अपने जोखिम के समय में लिखा था, जब वह अपने पुत्र अबशालोम के राजद्रोह के समय उससे अपने प्राण बचाता हुआ फिर रहा था। अबशालोम ने अपने पिता के विरुद्ध बलवा किया और उन्हें राजगद्दी से उतार दिया था; अपने प्राण बचाने के लिए दाऊद को बीहड़ में भागना पड़ा था (2 शमूएल 15-16)। इन कठिन समयों में भी दाऊद का विश्वास था कि परमेश्वर उसके साथ है और उसने परमेश्वर पर अपना पूरा विश्वास बनाए रखा; इस संदर्भ में दाऊद ने लिखा, "क्योंकि तेरी करूणा जीवन से भी उत्तम है मैं तेरी प्रशंसा करूंगा" (63:3)।

   कभी कभी जीवन कठिन एवं कष्टदायक हो सकता है; लेकिन उन सभी विपरीत परिस्थितियों में भी सहायता और सहारे के लिए सदैव परमेश्वर का हाथ हमारी ओर बढ़ा हुआ रहता है, हमें उपलब्ध रहता