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Friday, November 24, 2017

मीरास


   संभव है कि आपने उस छोटे लड़के का वीडियो देखा है जिसे पता चलता है कि उसे एक छोटी बहन मिलने वाली है, और वह निराश होकर कहता है, "बस सदा लड़कियाँ, लड़कियाँ, और लड़कियाँ ही होता है।" यह मानवीय अपेक्षाओं की एक दिलचस्प झलक तो है, परन्तु निराशा में कुछ भी हास्यसपद नहीं होता है। निराशा हमारे संसार में भरी पड़ी है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक घटनाक्रम है जिसमें निराशा भरी हुई है। याकूब ने अपने मामा और स्वामी की बेटी राहेल से विवाह करने हेतु, उसके लिए सात वर्ष तक कार्य करना स्वीकार कर लिया। परन्तु ऐसा करने के पश्चात, राहेल के पिता ने राहेल के स्थान पर उसकी बड़ी बहन लीआ: का धोखे से याकूब के साथ विवाह कर दिया, और याकूब को यह बात अगले दिन प्रातः पता चली। हम याकूब की निराशा की ओर तो ध्यान केंद्रित करते हैं, परन्तु ज़रा लीआ: के बारे में भी तो विचार करें - उसे कैसा लगा होगा! जब उसे उस व्यक्ति से विवाह करने के लिए बाध्य किया गया जो न तो उसे साथ रखना चाहता था और न ही उससे प्रेम करता था, तो लीया की कितनी आशाएं और विवाहित जीवन से संबंधित उसके कितने सपने धाराशायी हो गए होंगे।

   बाइबल में भजन 37:4 में लिखा है, "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।" क्या हम यह मान कर चलें कि परमेश्वर का भय मानने वाले लोग कभी निराश नहीं होते हैं? ऐसा नहीं है; यह भजन स्पष्ट दिखाता है कि भजनकार ने अपने चारों ओर निराशाओं को देखा था। परन्तु उसने दीर्घकालीन दृष्टिकोण अपनाया, और आगे कहा, "यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख" (पद 7)। उसका निष्कर्ष था, "परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (पद 11)।

   याकूब की कहानी में हम देखते हैं कि अन्ततः याकूब ने लीआ: को अधिक आदर दिया, और उसे अब्राहम, सारा, इसहाक और रिबका के संग पारिवारिक कब्रगाह में दफनाया (उत्पत्ति 49:31)। हम यह भी देखते हैं कि आगे चलकर लीआ: - जिसे लगता था कि उससे कोई प्रेम नहीं करता है, उसी की सन्तानों के वंश में से परमेश्वर ने सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह को संसार में भेजा। प्रभु यीशु जो न्याय बहाल करता है, आशा को पुनःस्थापित करता है, और हमारे सोच से भी कहीं बढ़कर एक मीरास हमें देता है। - टिम गुस्टाफसन


प्रभु यीशु ही एकमात्र ऐसा मित्र है जो कभी निराश नहीं करता है।

यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा; जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा। - भजन 37:34

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 29:13-30
Genesis 29:13 अपने भानजे याकूब का समाचार पाते ही लाबान उस से भेंट करने को दौड़ा, और उसको गले लगाकर चूमा, फिर अपने घर ले आया। और याकूब ने लाबान से अपना सब वृत्तान्त वर्णन किया। 
Genesis 29:14 तब लाबान ने याकूब से कहा, तू तो सचमुच मेरी हड्डी और मांस है। सो याकूब एक महीना भर उसके साथ रहा। 
Genesis 29:15 तब लाबान ने याकूब से कहा, भाईबन्धु होने के कारण तुझ से सेंतमेंत सेवा कराना मुझे उचित नहीं है, सो कह मैं तुझे सेवा के बदले क्या दूं? 
Genesis 29:16 लाबान के दो बेटियां थी, जिन में से बड़ी का नाम लिआ: और छोटी का राहेल था। 
Genesis 29:17 लिआ: के तो धुन्धली आंखे थी, पर राहेल रूपवती और सुन्दर थी। 
Genesis 29:18 सो याकूब ने, जो राहेल से प्रीति रखता था, कहा, मैं तेरी छोटी बेटी राहेल के लिये सात बरस तेरी सेवा करूंगा। 
Genesis 29:19 लाबान ने कहा, उसे पराए पुरूष को देने से तुझ को देना उत्तम होगा; सो मेरे पास रह। 
Genesis 29:20 सो याकूब ने राहेल के लिये सात बरस सेवा की; और वे उसको राहेल की प्रीति के कारण थोड़े ही दिनों के बराबर जान पड़े। 
Genesis 29:21 तब याकूब ने लाबान से कहा, मेरी पत्नी मुझे दे, और मैं उसके पास जाऊंगा, क्योंकि मेरा समय पूरा हो गया है। 
Genesis 29:22 सो लाबान ने उस स्थान के सब मनुष्यों को बुला कर इकट्ठा किया, और उनकी जेवनार की। 
Genesis 29:23 सांझ के समय वह अपनी बेटी लिआ: को याकूब के पास ले गया, और वह उसके पास गया। 
Genesis 29:24 और लाबान ने अपनी बेटी लिआ: को उसकी दासी होने के लिये अपनी दासी जिल्पा दी। 
Genesis 29:25 भोर को मालूम हुआ कि यह तो लिआः है, सो उसने लाबान से कहा यह तू ने मुझ से क्या किया है? मैं ने तेरे साथ रहकर जो तेरी सेवा की, सो क्या राहेल के लिये नहीं की? फिर तू ने मुझ से क्यों ऐसा छल किया है? 
Genesis 29:26 लाबान ने कहा, हमारे यहां ऐसी रीति नहीं, कि जेठी से पहिले दूसरी का विवाह कर दें। 
Genesis 29:27 इसका सप्ताह तो पूरा कर; फिर दूसरी भी तुझे उस सेवा के लिये मिलेगी जो तू मेरे साथ रह कर और सात वर्ष तक करेगा। 
Genesis 29:28 सो याकूब ने ऐसा ही किया, और लिआ: के सप्ताह को पूरा किया; तब लाबान ने उसे अपनी बेटी राहेल को भी दिया, कि वह उसकी पत्नी हो। 
Genesis 29:29 और लाबान ने अपनी बेटी राहेल की दासी होने के लिये अपनी दासी बिल्हा को दिया। 
Genesis 29:30 तब याकूब राहेल के पास भी गया, और उसकी प्रीति लिआ: से अधिक उसी पर हुई, और उसने लाबान के साथ रहकर सात वर्ष और उसकी सेवा की।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 22-23
  • 1 पतरस 1


Thursday, November 23, 2017

खामोशी


   मेरे एक मित्र ने कहा, छिछले नदी-नाले सबसे अधिक शोर करते हैं, जो कि एक सुप्रसिद्ध कहावत, "गहरे जल निश्चल होते हैं" का विलोम था। उसके कहने का तात्पर्य था कि जो लोग सबसे अधिक शोर करने वाले होते हैं उनके पास कहने के लिए कुछ खास नहीं होता है। इस समस्या का एक पहलु और भी है, कि बहुत बोलने वाले ठीक से सुनते भी नहीं हैं। मुझे साईमन और गारफ़न्कल के एक गीत, Sounds of Silence में कही गई बात स्मरण आती है, लोग बिना ध्यान दिए सुनते हैं। वे कहे जा रहे शब्दों को कानों से तो सुनते हैं, परन्तु अपने विचारों को शान्त कर के वास्तव में ध्यान से मन से नहीं सुनते हैं। हमारे लिए भला होगा यदि हम हम शान्त हो कर ध्यान से मन से सुनना आरंभ कर दें।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि "...चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है" (सभोपदेशक 3:7)। अच्छी खामोशी, सुनने वाली खामोशी, नम्रता की खामोशी होती है। ऐसी खामोशी से सही सुना जाता है, बात को सही समझा जाता है, और फिर सही बात कही जाती है। नीतिवचन का लेखक लिखता है, "मनुष्य के मन की युक्ति अथाह तो है, तौभी समझ वाला मनुष्य उसको निकाल लेता है" (नीतिवचन 20:5)। बात की तह तक पहुँचने के लिए बहुत ध्यान से शान्त होकर सुनना अनिवार्य होता है।

   जब हम औरों की सुनते हैं, तो साथ ही हमें परमेश्वर की भी सुनने और जो वह कहता है उस पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है। मैं उस घटना के बारे में सोचता हूँ जब फरिसी व्यभिचार में पकड़ी गई एक स्त्री को प्रभु के पास ले कर आए और उस स्त्री के विरुद्ध आरोपों तथा निन्दा की झड़ी लगाए हुए बोले जा रहे थे; परन्तु प्रभु खामोश होकर अपनी ऊँगली से मिट्टी पर कुछ लिख रहा था (देखिए यूहन्ना 8:1-11)। प्रभु क्या कर रहा था? मेरा सुझाव है कि वह परमेश्वर पिता की आवाज़ को सुन रहा होगा कि इस क्रुद्ध भीड़ को क्या उत्तर दिया जाए, और इस प्रिय स्त्री से क्या कहा जाए? प्रभु का अपनी खामोशी द्वारा दिया गया उत्तर आज भी संसार भर में गूँज रहा है, लोगों से बातें कर रहा है। - डेविड रोपर


समयानुसार खामोशी बहुत शब्दों से अधिक अर्थपूर्ण हो सकती है।

जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है। - नीतिवचन 10:19

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:1-7
Ecclesiastes 5:1 जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना, मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। 
Ecclesiastes 5:2 बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।
Ecclesiastes 5:3 क्योंकि जैसे कार्य की अधिकता के कारण स्वप्न देखा जाता है, वैसे ही बहुत सी बातों का बोलने वाला मूर्ख ठहरता है। 
Ecclesiastes 5:4 जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना। 
Ecclesiastes 5:5 मन्नत मान कर पूरी न करने से मन्नत का न मानना ही अच्छा है। 
Ecclesiastes 5:6 कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुन कर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे? 
Ecclesiastes 5:7 क्योंकि स्वप्नों की अधिकता से व्यर्थ बातों की बहुतायत होती है: परन्तु तू परमेश्वर को भय मानना।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5


Wednesday, November 22, 2017

मुख्य बात


   हमारे शहर में एक उत्सव के दौरान की जा रही आतिशबाज़ी को देखते समय मेरा ध्यान बार-बार बंट रहा था। मुख्य समारोह के दोनों ओर, बीच-बीच में छोटी आतिश्बाज़ी होने लगती थी, जिससे मेरा ध्यान मुख्य आतिश्बाज़ी से बंट जाता था। वे छोटी वाली आतिशबाज़ियाँ अच्छी तो थीं, परन्तु उन्हें देखने के कारण मैं हमारे ऊपर हो रही मुख्य आतिशबाज़ी के कुछ अंश देखने से रह जाती थी।

   कई बार अच्छी बातें हमें और बेहतर बातों से अलग कर देती हैं। यही मार्था के साथ भी हुआ, जिसके बारे में परमेश्वर के वचन बाइबल के ने नियम में लूका 10:38-42 में दिया गया है। जब प्रभु यीशु और उनके चेले बैतनियाह गाँव में पहुँचे, तो मार्था ने अपने घर में उनका स्वागत किया। अच्छी मेज़बान होने के नाते वह अपने मेहमानों के लिए भोजन बनाने में लग गई, इसलिए हमें मार्था के प्रति सख्त रवैया नहीं रखना चाहिए।

   जब मार्था ने प्रभु यीशु से शिकायत की, कि उसकी बहन मरियम उनकी देखभाल कार्यों को करने में उसका हाथ नहीं बंटा रही है, तो प्रभु यीशु ने मरियम के चुनाव - प्रभु के चरणों पर बैठ कर उसके वचन को सुनने का समर्थन किया। परन्तु इससे प्रभु का यह तात्पर्य नहीं था कि मरियम अपनी बहन मार्था से अधिक आत्मिक या धर्मी है। एक अन्य अवसर पर प्रतीत होता है कि मार्था ने मरियम की अपेक्षा प्रभु पर अधिक भरोसा रखा था (यूहन्ना 11:19-20)। न ही प्रभु मार्था के उनके शारीरिक आवश्यकताओं के प्रति चिंतित होने की आलोचना कर रहा था। वरन जो बात प्रभु मार्था पर प्रगट करना चाहता था वह थी कि जीवन की व्यस्तता में भी मुख्य बात प्रभु के साथ समय बिताना, उसके साथ बैठना ही है। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु को हमारी संगति की लालसा रहती है।

एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं। - भजन 27:4 

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है।