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Monday, October 17, 2016

सदा विद्यमान


   जब हमारी बेटी कैथरीन बहुत छोटी थी, अभी वह चल या रेंग भी नहीं पाती थी, तब उसने लोगों से अपने आप को छिपाने, या अपने आप को अकेला कर लेने, या अपनी मर्ज़ी करने का मार्ग बना लिया था - वह बस अपनी आँखें बन्द कर लेती थी। कैथरीन को लगता था कि यदि वह किसी को देख नहीं पा रही है तो कोई और भी उसे देख नहीं पा रहा है, और वह अपने आप में एकान्त में है। जब हम उसे कार में लेकर कहीं जाते और कोई नया अनजान व्यक्ति उससे हैलो करता, तब वह यही करती; यदि खाने के समय उसे मेज़ पर से दिए जा रहे भोजन का इन्कार करना होता तब भी वह यही करती और जब हम रात में उससे कहते कि अब उसके सोने का समय हो गया है तो हमें नज़रन्दाज़ करने के लिए भी वह यही करती।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र, योना ने भी अपने आप को परमेश्वर से छुपाने का कुछ ऐसा ही तरीका निकाला था, लेकिन जैसे हमारी बेटी कैथरीन का तरीका सफल नहीं होने पाया, योना का तरीका भी सफल नहीं हुआ। परमेश्वर ने योना से कहा कि वह निनवे जाकर वहाँ के लोगों के मध्य परमेश्वर के नाम से पश्चाताप करने का प्रचार करे क्योंकि उनके पाप के कारण निनवे के लोगों का विनाश आने को था। लेकिन योना निनवे के लोगों से बैर रखता था और वह निनवे जाने की बजाए उसकी विपरीत दिशा में चला गया, अपने आप को परमेश्वर से छिपा लेने का प्रयास करने लगा। लेकिन योना ने शीघ्र ही जान लिया कि वह परमेश्वर से छिप कर कहीं नहीं जा सकता है; ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ परमेश्वर उसे देख नहीं सकता है। बाइबल ऐसी कहानियों से भरी पड़ी है जिनमें परमेश्वर ने उन लोगों को ढूँढ़ लिया जो उससे छुपना चाहते थे (निर्गमन 2:11-36; 1 राजा 19:1-7; प्रेरितों 9:1-19)।

   हो सकता है कि आपने भी परमेश्वर से छिपने का, यह समझने का प्रयास किया हो कि परमेश्वर आपको देख नहीं सकता है। लेकिन यह जान लीजिए, यदि एक बलवाई भविष्यद्वक्ता योना द्वारा एक विशाल मछली के पेट से करी गई प्रार्थना को परमेश्वर सुन सकता है, तो फिर आप चाहे जहाँ भी हों, उस स्थान से परमेश्वर आप को भी भली-भांति देख और सुन सकता है; जो भी आपने किया या कहा है, परमेश्वर को वह सब पता है।

   लेकिन यह कोई भयभीत होने की नहीं, वरन बड़ी शान्ति और सुख की बात है - वह हर समय हर स्थान पर सदा विद्यमान सर्वज्ञानी परमेश्वर है जो हमारी प्रत्येक बात, प्रत्येक भावना, प्रत्येक बुराई को जानने के बावजुद हम से प्रेम करता है, प्रभु यीशु मसीह में होकर वह हमें अपने साथ ले लेना चाहता है, हमारी देखभाल करना चाहता है और हमारे लिए भलाई ही करना चाहता है। - रैंडी किल्गोर


जब तक परमेश्वर की नज़र हम पर बनी हुई है, हमें अपने आस-पास की
 परिस्थितियों और परेशानियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है।

मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। - भजन 139:7-10

बाइबल पाठ: योना 1:1-2:1
Jonah 1:1 यहोवा का यह वचन अमितै के पुत्र योना के पास पहुंचा, 
Jonah 1:2 उठ कर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है। 
Jonah 1:3 परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और यापो नगर को जा कर तर्शीश जाने वाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ हो कर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।
Jonah 1:4 तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था। 
Jonah 1:5 तब मल्लाह लोग डर कर अपने अपने देवता की दोहाई देने लगे; और जहाज में जो व्यापार की सामग्री थी उसे समुद्र में फेंकने लगे कि जहाज हल्का हो जाए। परन्तु योना जहाज के निचले भाग में उतरकर सो गया था, और गहरी नींद में पड़ा हुआ था। 
Jonah 1:6 तब मांझी उसके निकट आकर कहने लगा, तू भारी नींद में पड़ा हुआ क्या करता है? उठ, अपने देवता की दोहाई दे! सम्भव है कि परमेश्वर हमारी चिन्ता करे, और हमारा नाश न हो।
Jonah 1:7 तब उन्होंने आपस में कहा, आओ, हम चिट्ठी डाल कर जान लें कि यह विपत्ति हम पर किस के कारण पड़ी है। तब उन्होंने चिट्ठी डाली, और चिट्ठी योना के नाम पर निकली। 
Jonah 1:8 तब उन्होंने उस से कहा, हमें बता कि किस के कारण यह विपत्ति हम पर पड़ी है? तेरा उद्यम क्या है? और तू कहां से आया है? तू किस देश और किस जाति का है? 
Jonah 1:9 उसने उन से कहा, मैं इब्री हूं; और स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा जिसने जल स्थल दोनों को बनाया है, उसी का भय मानता हूं। 
Jonah 1:10 तब वे निपट डर गए, और उस से कहने लगे, तू ने यह क्या किया है? वे जान गए थे कि वह यहोवा के सम्मुख से भाग आया है, क्योंकि उसने आप ही उन को बता दिया था।
Jonah 1:11 तब उन्होंने उस से पूछा, हम तेरे साथ क्या करें जिस से समुद्र शान्त हो जाए? उस समय समुद्र की लहरें बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:12 उसने उन से कहा, मुझे उठा कर समुद्र में फेंक दो; तब समुद्र शान्त पड़ जाएगा; क्योंकि मैं जानता हूं, कि यह भारी आंधी तुम्हारे ऊपर मेरे ही कारण आई है। 
Jonah 1:13 तौभी वे बड़े यत्न से खेते रहे कि उसको किनारे पर लगाएं, परन्तु पहुंच न सके, क्योंकि समुद्र की लहरें उनके विरुद्ध बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:14 तब उन्होंने यहोवा